Heat Wave: जानिए, क्यों हैं मई के नौ दिन धार्मिक और वैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण

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फोटो द्वारा महेंद्र 

अयोध्या। पूरे देश मे आज से नौतपा की शुरुआत हो गई है। 25 मई से 2 जून तक का ये नौ दिन धार्मिक और वैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। जहां एक तरफ स्वास्थ्य विभाग सहित शासन और प्रशासन इन दिनों कड़ी धूप और गर्मी से लोगों को सतर्क रहने की अपील कर है, वहीं दूसरी तरफ धर्म गुरु भी नैतपा का महत्व बता रहे है।

इस बार नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले नौ दिनों में तापमान में और वृद्धि हो सकती है तथा भीषण गर्मी और Heat Wave चलने के आसार हैं। भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

डॉक्टरों का कहना है कि दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। यदि किसी जरूरी कार्य से बाहर जाना पड़े तो फुल आस्तीन के हल्के सूती कपड़े पहनें और सिर को गमछा, टोपी या छाते से ढककर रखें। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, ORS और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लापरवाही बरतने पर Heat Stroke, Dehydration, चक्कर आना, उल्टी और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन ने लोगों से गर्मी के दौरान सतर्क रहने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है।

नौतपा का धार्मिक महत्व

दूसरी ओर साकेत सदन अयोध्या के संत सीताराम दास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार नौतपा के दिन वर्ष के सबसे गर्म नौ दिन माने जाते हैं। इस दौरान सूर्य देवता रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और उनकी किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान चरम पर पहुंच जाता है।

उन्होंने बताया कि इस समय साधु-संत और श्रद्धालु सूर्य की तपिश से बचाव करते हुए देवी-देवताओं को शीतल पदार्थों का भोग लगाते हैं तथा सूर्य देव की आराधना कर शीतलता देने के साथ-साथ कल्याण करने की प्रार्थना करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौतपा में जल और अन्न का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। जरूरतमंदों को पानी के मटके, छाते और अनाज का दान करना शुभ माना जाता है।

जानिए.. कब लगती है लू

गर्मी में शरीर के द्रव्य Body Fluid सूखने लगती हैं। शरीर से पानी नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में निम्न स्थितियों में लोगों को लू लगने की संभावना अधिक रहती हैं।

  1. शराब की लत हृदय रोग पुरानी बीमारियों मोटापा, पार्किंसंस रोग अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह।
  2. 2. ऐसी कुछ औषधियों जैसे Diuretic, Antihistaminic मानसिक रोग की कुछ औषधियों।

हीट स्ट्रोक के लक्षण

  1. शरीर का गर्म और शुष्क हो जाना, पसीना न आना।
  2. तेज पल्स होना
  3. उथले श्वास गति में तेजी।
  4. व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति।
  5. सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी होना चक्कर आना।
  6. पेशाब न होना अथवा इसमें कमी आना।

हीट वेव के लक्षणों के चलते मनुष्यो के शरीर में कई प्रभाव पड़ता है-

  1. उच्च तापमान से शरीर के आंतरिक अंगों विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है तथा शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न करता हैं।
    2. मनुष्य के हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होता हैं।
    3. जो लोग एक या दो घण्टे से अधिक समय तक 40.6 डिग्री सेल्सियस 105 डिग्री तक या अधिक तापमान अथवा गर्म हवा में रहते है तों उनके मस्तिष्क में क्षति होने की संभावना प्रबल हो जाती है।

हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय

हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए-

क्या करें-

  1. प्रचार माध्यमों पर हीट वेव/लू की चेतावनी पर ध्यान दें।
  2. अधिक से अधिक पानी पियें, यदि प्यास न लगी हो तब भी।
  3. हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें।
  4. धूप के चश्मे, छाता, टोपी, व चप्पल का प्रयोग करें।
  5. अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ पैरो को गीले कपड़े से ढके रहें तथा छाते का प्रयोग करें। लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछे अथवा नहलाये तथा चिकित्सक से सम्पर्क करें।
  6. यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ ले जाए।
  7. ORS, घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माड़), नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें, जिससे कि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके।
  8. Heat Stroke, Heat Rash, Heat Camp के लक्षणों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचानें।
  9. यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते है तो तुरन्त चिकित्सीय सलाह लें।
  10. अपने घरों को ठंडा रखें, पर्दे दरवाजे आदि का उपयोग करें तथा शाम/रात के समय घर तथा कमरों को ठंडा करने हेतु इसे खोल दें।

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